कर्नाटक HC में हिजाब प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं में याचिकाकर्ता के वकील ने क्या दलीले दी।

आज कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार कर्नाटक शिक्षा अधिनियम का हवाला देते हैं

कंहा की – नियम कहता है कि जब शिक्षण संस्थान वर्दी बदलने का इरादा रखता है, तो उसे माता-पिता को एक साल पहले नोटिस जारी करना पड़ता है; अगर हिजाब पर बैन है तो उसे एक साल पहले सूचित करना चाहिए था

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार कहते हैं की अधिनियम (कर्नाटक शिक्षा अधिनियम) के तहत कोई प्रावधान नहीं हैं और न ही हिजाब पहनने पर प्रतिबंध के नियम हैं

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार का कहना है कि कॉलेज विकास समिति के पास छात्रों पर पुलिस का अधिकार नहीं हो सकता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार कहते हैं की एक विधायक (जो समिति का अध्यक्ष भी है) एक राजनीतिक दल या एक राजनीतिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करेगा और क्या आप छात्रों के कल्याण को किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक विचारधारा को सौंप सकते हैं?

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार आगे कहते हैं कि इस तरह की समिति का गठन हमारे लोकतंत्र को मौत का झटका देता है।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने उनसे पूछा – आप कहते हैं कि कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी को यूनिफॉर्म निर्धारित करने का कोई अधिकार नहीं है।

सीनियर एडवोकेट प्रोफेसर रविवर्मा कुमार कहते हैं – सरकार अकेले हिजाब क्यों चुन रही है … चूड़ी पहनने वाली हिंदू लड़कियों और क्रॉस पहनने वाली ईसाई लड़कियों को बाहर क्यों नहीं भेजा जाता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार कहते हैं- शासनादेश में किसी अन्य धार्मिक चिन्ह पर विचार नहीं किया गया है। सिर्फ हिजाब ही क्यों? क्या यह उनके धर्म के कारण नहीं है? मुस्लिम लड़कियों के साथ भेदभाव विशुद्ध रूप से धर्म पर आधारित है।

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