15 साल की मेहनत मिनटों में नष्ट हो गई। किसान की दर्दभरी दांस्ता।

गुजरात- चक्रवात तौकता ने राज्य के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया और पश्चिमी तट पर तबाही के निशान छोड़ गए। अधिकारियों के अनुसार  चक्रवात की तीव्रता कमजोर होने के बावजूद, यह विनाश के निशान को पीछे छोड़ गया, जिसमें कम से कम चार लोगों की जान चली गई- भावनगर, राजकोट, पाटन और वलसाड में एक-एक। हवा की तीव्रता 140 से 150 घंटे की रफ्तार होने के कारण पेडों को काफी नुकसान हुआ।


अपने घरों और आश्रयों के अंदर रात गुजारने के बाद, लोग अपने चारों ओर मलबे के दृश्यों के लिए जाग गए क्योंकि तौक्ते ने गिर-सोमनाथ, जूनागढ़, अमरेली और भावनगर के तटीय जिलों में एक विनाशकारी निशान छोड़ा। भावनगर से जूनागढ़ तक 200 किलोमीटर के तट पर चपटे घर, टिन शेड, छतें उड़ गईं, खेतों में पानी भर गया, टूटी सड़कें, हजारों पेड़ गिर गए और बिजली के खंभे गिर गए। ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजली के खंभों को भारी नुकसान होने से सैकड़ों गांव अंधेरे में रहेंगे.

इतना ही नही तूफान ने लोगो की 15 साल की मेहनत मिनटों में नष्ट कर दिया। गुजरात के अमरेली में आम के किसानों को चक्रवात तौकता के प्रभाव में नुकसान उठाना पड़ा। किसानों में से एक जिग्नेश कहते हैं, बिन मौसम तेज हवा के साथ बारिस ने पूरे जिले के आम के फल को नुकसान के साथ पेड़ो को जड़ो से उखाड़ दिया है। जिला प्रशाशन द्वारा नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है। “करीब 1200-1300 पेड़ उखड़ गए हैं, यह हमारी 10-15 साल की मेहनत थी। उन्हें लगाने में हमें उतना ही समय लगेगा। इस सब के नुकसान के लिए सरकारी मदद की गुवहार लगा रहे है। अमरेली जिला द्वारा अकेलेही 700 हेक्टेयर आम की खेती की जाती है। तूफान के कारण करोड़ो रूपये नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

स्थानिक लोगो का कहना है गर्मी के अंत मे अक्सर आम की खेती की जाती है। लेकिन तूफान कारण अब यह भी मुमकिन नही है। इस समय हम पके आम तोड़कर बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता था लेकिन इस तूफान ने पूरी तरह से फसल को नष्ठ कर दिया। – जिग्नेश ने कंहा”

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